हर्बल टी पीने के इतने सारे फायदे | herbal tea ingredients, recipe and benefits in hindi

तो आज जानते है वो सब कुछ जो जुड़ा है आपकी चाय और उसको पीने की अदा से . एक अच्छी चाय बनाने से पहले जान लीजिये की चाय कितने प्रकार की होती है ?

हर्बल टी पीने के इतने सारे फायदे | herbal tea ingredients, recipe and benefits in hindi
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कैसे बनाये चाय जो आपमें ताज़गी के साथ सेहत भी भर दे। 


चाय के प्रकार 

मोटे तौर पर इसे दो भागो में विभाजित कर लेते हैं। 

  1. प्रोसेस्ड (Processed Tea )- कट टीअर एंड कर्ल (Cut , Tear and Curl )
  2. ग्रीन टी ( Green Tea )   -   नॉन प्रोसेस्ड (Non Processed )
घर हो या रेस्त्रा ,होटल हो या चाय की गुमटी, या हो नुक्कड़ सभी जगह प्रोसेस्ड टी ही हमें अधिकतर मिलती है। 

ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट्स सब प्रचुर मात्रा में होते हैं।  इसे दूध चीनी के बिना पीने की वजह से इसमें कैलोरी न के बराबर होती है। 

अब बात करते हैं हर्बल टी (Herbal Tea)  की।  यह चाय का कौन सा प्रकार है।  

 

 हर्बल टी (Herbal Tea)


जैसा की नाम से ही पता चला है की यह एक herbs से बानी चाय है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसे जड़ी बूटी मिला कर बनाया जाता है। जिससे ये स्वाद और सेहत से भरपूर हो जाती है। 


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आजकल की सबसे ज्यादा ट्रैंडिंग चाय ( जो चलन में है )

  1. स्ट्रेस रिलीविंग टी 
  2. रिजूवेनेटिंग  टी 
  3. स्लिमिंग टी 
  4. आइस टी 
  • चाय में सबसे ज्यादा कैफीन होता है साथ ही तीन की वजह से यह शरीर को फुर्ती का एहसास देती है। 
  • चाय में एथ -थिएनाइन  (Amino -acid ) दिमाग को अलर्ट और शांत बना देता है।  




चाय के गुण (फायदे) 


बुढ़ापे से बचने में मददगार है चाय का सेवन 


चाय में मौजूद एंटी एजिंग गुण बुढ़ापे की रफ़्तार को धीमा कर देते है। साथ ही फ्लोराइड हड्डियों को मजबूत बनता है। 

चाय के फायदे शारीरिक रोग में


कैंसर, हाई-कोलेस्ट्रॉल, एलर्जी, लिवर, दिल की बिमारियों तथा अर्थरिटिस ( गठिया ) की रोकथाम के साथ bad cholesterol को कंट्रोल कर सकती है चाय। 

 चाय के नुक्सान 

चाय का अधिक सेवन एसिडिटी, आयरन को ऑब्ज़र्व करने की छमता में कमी, खुश्की, दाँतों का पीलापन, पाचन में दिक्कत, नींद न आने की समस्या या फिर चाय की लत लग जाना आदि चाय के नुक्सान है। 

    साथ ही अगर आप चाय में दूध डाल कर पीते हैं तो चाय के गुण भी समाप्त हो जाते हैं। और चीनी होने के कारण शरीर में कैल्सियम की मात्रा भी कम होने लगती है। तो चाय को दूध और चीनी के साथ बनाना  बिलकुल ठीक नहीं होता। तो प्रश्न आता है की एक सही चाय कैसे बनायें। तो आज हम आपको चाय बनाने का सही तरीका बताने जा रहे हैं। 

चाय बनाने का सही तरीका क्या है?

    चाय बनाने के लिए आपको ताज़ा पानी उबालना है।  जब चाय के पानी में पहला उबाल आ जाये।  ध्यान रक्खें पानी बस 1/2 मिनट ही उबालना है। अब एक कप में चाय पत्ती डालें और सारा पानी कप में उड़ेल कर बर्तन को ढक  छोड़ दें।  
    5 मिनट बाद इसे छान लें और अपने मनपसंद फ्लेवर के साथ एन्जॉय करें। 

सावधानी 

    चाय पत्ती को कभी उबालना नहीं है उबालने से इसके फायदे ख़त्म हो जायेंगे।  

चाय का कितनी मात्रा में सेवन करें 

    यदि आप उपरोक्त विधि से चाय बना रहे हैं साथ ही अपनी पसंद की herbs इस्तेमाल करें तो आप इसे 5 -6  कप भी पी सकते हैं। 
    अधिकतम 8 कप चाय ही लें।  जो आपके शरीर को  5 -6  कप में Magnesium की 45 %  मात्रा ही मिल सकती है। 


एक मनुष्य को रोजाना कितने मैग्नीशियम की आवशयकता होती है 


    हमें रोजाना 2 -5 mg मैग्नीशियम की आवश्यकता रोजाना होती है। गर्भवती महिलाओं को रोजाना 5 कप से ज्यादा चाय नहीं लेनी चाहिए। 

चाय कैसे और कब पियें 

चाय शहद और नीम्बू के साथ लेना काफी अच्छा होता है। 

हर्बल टी के बारे में 

क्या होती है हर्बल टी 

    यह चाय पारम्परिक चाय से अलग होती है जो पूरी तरह से भारतीय है। इसमें विभिन्न प्रकार के ताज़े फूल, बीज, जड़ और सुखी औषधियां मिलायी जाती हैं। 
    आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं की हर्बल टी में एंटी ऑक्सीडेंट और कोलेस्ट्रॉल भरपूर मात्रा में होते हैं।  जो हृदय के लिए काफी अच्छा होता है। एथ -थिएनाइन, जो की ग्रीन टी में होता है यह आपकी Immunity Boost करने में तथा स्लिम करने में सहायक होता है। 
    आयुर्वेदिक टर्म की बात करें तो इसमें चाय नहीं बल्कि काढ़ा शब्द का प्रयोग होता है। 

हर्बल टी ( काढ़ा ) के लाभ 

    जुकाम, साइनस, जोड़ो के दर्द, शरीर को ठंडक पहुंचने, पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, सर दर्द, कब्ज, मोटापा, तनाव,आदि में हर्बल टी यानि आयुर्वेदिक काढ़ा रामबाण है। 
      

हर्बल टी बनाने की विधि 

  1. कैमोमाइल टी - बबूने के फूल से बनाई चाय को कैमोमाइल टी कहते हैं। प्राचीन काल में मिस्र के लोगों द्वारा इन फूलों की खेती होती थी 

कैसे बनाए कैमोमाइल टी

    बबूने के फूलों को 100 ml पानी में अच्छी तरह उबाल कर ठंडा कर लें और सेवन करें। 

कैमोमाइल टी पीने के लाभ 

    अनियमित माहवारी, गैस, मांसपेशियों का खिचाव, किडनी व अनिद्रा के लिए फायदेमंद है।    

          2 . क्रायेथेसिम टी (गुलदावदी )- स्वाद और सुगंध की रानी इस चाय में  Vitamin -C  और Vitamin -                       A  काफी मात्रा में पाया जाता है। इम्युनिटी के लिए काफी अच्छी है ये चाय। 

 क्रायेथेसिम टी पीने के लाभ 

    त्वचा रोग, आई ड्राई नेस , सर्दी खॉंसी, जुकाम, कफ, बुखार, आदि में लाभकारी होती है तथा शरीर को ठंडक देती है। 

          3  जैस्मिन टी - चमेली की खुशबू वाली यह चाय महिलाओं की सबसे लोकप्रिय चाय है। 


 जैस्मिन टी पीने के लाभ-

     बढ़ती उम्र के प्रभावों को नियंत्रित करती है। एंटी आक्सीडेंट तथा फ्री रेडिकल्स त्वचा की सुरक्षा परत बनती है।  हाई  ब्लड प्रेस्सेर तथा कैंसर सेल्स की वृद्धि रोकने में मदद करती है। 



देसी हर्बल टी 

    सर्वाधिक लोकप्रिय चाय यानि की काढ़ा, अदरक, सौंफ, तुलसी की पत्ती, दालचीनी को बराबर मात्रा में पानी में ढक कर बनाई गई यह चाय काफी ज्यादा लोकप्रिय है। 

काढ़ा पीने के लाभ 

जुकाम, सर्दी, खांसी, बुखार, अपच, सिरदर्द, एसिडिटी, आदि में लाभकारी। 

            5  गुड़हल टी -   गुड़हल के फूलों को अच्छी तरह पानी में उबाल कर नीम्बू के साथ सेवन करें। 

गुड़हल टी पीने के लाभ- 

    यह चाय ख़राब कोलेस्ट्राल को ख़तम करती है। हाई  ब्लड प्रेशर और कैंसर के खतरे को काम करती है। 

इसी प्रकार 

पिपरमेंट टी, सिंहपर्णी टी, डंडेलियनं टी, वाइट टी-जो की कैमेलिया सिनेसिस के पौधों से बनती है। एंटी एजिंग फार्मूले की वजह से काफी लोकप्रिय है।  

               6 . कैनबिस (भांग) की चाय -आम तौर पर यह बनाई नहीं जाती तर इसका सेवन पुराने दर्द, पेट की                        ऐठन जैसी समस्याओं को दूर करने में किया जा सकता है   
             7 . स्टार अनीस टी - कब्ज, उलटी और एसिडिटी के लिए काफी फायदेमंद होती है। 

              8 . रोज़ टी - चेहरे पर निखार के लिए बना सकते हैं। 

हर्बल टी पीने के नुक्सान -

  • स्तन पान करने वाली महिलाओं को तथा गर्भ धारण के समय भांग की चाय या वाइट टी नहीं पीनी चाहिए।  
  • हर्बल टी वजन काम कर सकती है। 
  • हर्बल टी को सपोर्ट के रूप में ले सकते हैं पर वजन नियंत्रण के लिए इसपर पूर्ण रूप से निर्भर नहीं रहना चाहिए। 

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